ॐ जय अम्बे गौरी – आरती माँ अम्बे की | Om jai ambe gauri

माँ अम्बे की प्रसिद्ध आरती – ॐ जय अम्बे गौरी

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हमारे सभी पाठकों को हमारा सादर नमस्कार आज के इस अध्याय में हम माता गौरी की सबसे प्रसिद्ध और भक्तिमय आरती जय अम्बे गौरी, Om jai ambe gauri लेकर आए हैं।

साईं बाबा की आरती से दूर होते है हर दुःख और कष्ट

हिंदू धर्म में अटूट आस्था रखने वाला हर भक्त इस बात को जानता है की सभी देवी देवताओं में माता रानी यानि अम्बे गौरी सर्व शक्तिशाली है, मां अम्बे मां दुर्गा का ही एक रूप है और जैसा कि हम सब जानते हैं उन्हें आदिशक्ति का भी दर्जा प्राप्त है, आज हम जो आरती जय अम्बे गौरी, om jai ambe gauri आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं वह मां अम्बे को अत्यधिक प्रिय है। वैसे तो जो भी भक्त सच्चे मन और निस्वार्थ भाव से माता अम्बे की पूजा करता है मां उसकी हर मनोकामना पूर्ण करती है पर फिर भी आप अपनी पूजा और अपनी भक्ति का दोगुना लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो मां अम्बे की पूजा करते वक्त इस आरती का गुणगान जरूर करें इस आरती से मां अत्यधिक प्रसन्न होती है और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती है।

हमारे पिछले अध्याय में हमने भगवान श्री गणेश की आरती और देवों के देव महादेव शिव की आरती का भी उल्लेख किया है और हमारा आपसे अनुरोध होगा की उन आरती को भी एक बार जरूर पढ़ें और उन आरतियों को भी अपनी पूजा में शामिल करें ताकि आपकी पूजा सफल हो और आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए।

Om Jay Ambe Gauri आरती का गुणगान कब करें

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वैसे तो सामान्य अवस्था में भी आप इस आरती का उपयोग मां अम्बे की पूजा अर्चना करते वक्त कर सकते हैं पर कुछ खास पर्व और त्योहार हैं जिनमें अगर इन आरती का उपयोग मां की पूजा करते वक्त की जाए तो मां अत्यधिक प्रसन्न होती है और हमारे हर मनोकामना पूर्ण करती हैं, आइए जान लेते हैं वह कौन से ऐसे पर्व हैं जिनमें अगर आप इस आरती om jai ambe gauri का उपयोग करते हैं तो आपको दुगना फल प्राप्त होगा।

  1. दुर्गा पूजा
  2. नवरात्रि
  3. माता की चौकी की स्थापना के वक्त
  4. देवी जागरण के समारोह के अवसर पर
  5. वट सावित्री
  6. माता के व्रत
  7. करवा चौथ

ॐ जय अम्बे गौरी – आरती, om jai ambe gauri

ॐ जय अम्बे गौरी - आरती, om jai ambe gauri
ॐ जय अम्बे गौरी – आरती, om jai ambe gauri

अगर इन व्रत और त्योहारों के अवसर पर आप मां अम्बे की पूजा करते वक्त इस आरती om jai ambe gauri का गुणगान करते हैं तो यकीन मानिए मां अम्बे अत्यधिक प्रसन्न होती हैं और आपके जीवन में आने वाले समस्त कष्टों का निवारण करती हैं।

जय अम्बे गौरी
मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशदिन ध्यावत
हरि ब्रह्मा शिवरी
ॐ जय अम्बे गौरी॥

मांग सिंदूर विराजत
टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना
चंद्रवदन नीको
ॐ जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर
रक्ताम्बर राजै
रक्तपुष्प गल माला
कंठन पर साजै
ॐ जय अम्बे गौरी॥

केहरि वाहन राजत
खड्ग खप्पर धारी
सुर-नर-मुनिजन सेवत
तिनके दुखहारी
ॐ जय अम्बे गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित
नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर
सम राजत ज्योती
ॐ जय अम्बे गौरी॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे
महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना
निशदिन मदमाती
ॐ जय अम्बे गौरी॥

चण्ड-मुण्ड संहारे
शोणित बीज हरे
मधु-कैटभ दोउ मारे
सुर भयहीन करे
ॐ जय अम्बे गौरी॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी
तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी
तुम शिव पटरानी
ॐ जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत
नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंगा
अरू बाजत डमरू
ॐ जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता
तुम ही हो भरता
भक्तन की दुख हरता
सुख संपति करता
ॐ जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित
खडग खप्पर धारी
मनवांछित फल पावत
सेवत नर नारी
ॐ जय अम्बे गौरी॥

कंचन थाल विराजत
अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत
कोटि रतन ज्योती
ॐ जय अम्बे गौरी॥

श्री अंबेजी की आरति
जो कोइ नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी
सुख-संपति पावे
ॐ जय अम्बे गौरी॥

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ॥

निष्कर्ष, Conclusion

तो यह थी माता की आरती ओम जय अम्बे गौरी, om jai ambe gauri हम आशा करते हैं कि आप जब कभी भी माता रानी की पूजा अर्चना करेंगे तो इस आरती का गुणगान जरूर करेंगे और मैं आप सब से अनुरोध करूंगा कि जब भी आप माता की आरती om jai ambe gauri का गुणगान करें तो आरती खत्म होने के बाद अपने दोनों हाथों को जोड़कर माता के सामने अपने समस्त दुखों को प्रकट करें और उनसे प्रार्थना करें की माता रानी अपना आशीर्वाद आपके और आपके परिवार को दें ताकि आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, सफलता और वैभव की प्राप्ति हो

माता रानी आप सबका कल्याण करें

जय मां अम्बे गौरी

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