देवगुरु बृहस्पति जी की आरती (shri brihaspati dev ji ki aarti)

brihaspati ji ki aarti lyrics
shri brihaspati dev ji ki aarti

हमारे सभी पाठकों को हमारा सादर नमस्कार आज हम से आप सभी के लिए समस्त देवी देवताओं के गुरु श्री बृहस्पति जी की आरती (shri brihaspati dev ji ki aarti) प्रस्तुत करने जा रहे हैं। हिंदू वेद और पौराणिक ग्रंथों में श्री बृहस्पति के कई उल्लेख हमें मिलते हैं और हिंदू वेदों के अनुसार श्री बृहस्पति एक तेजस्वी और तपस्वी ऋषि थे।

भारत के कई प्रांतों में श्री बृहस्पति को तीक्ष्णशृंग और गृहपुरोहित नाम से भी जाना जाता है। श्री बृहस्पति को ब्रह्मांड के समस्त देवी देवताओं का गुरु माना जाता है और यही एक वजह है कि उन्हें देव गुरु बृहस्पति की उपाधि प्राप्त है वे अत्यंत ही पराक्रमी और तेजस्वी थे, देव गुरु बृहस्पति के पराक्रम का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने देवराज इंद्र को युद्ध में पराजित किया था और यही एक वजह है कि समस्त देव उनकी प्रार्थना करते हैं, देवगुरु अत्यंत ही परोपकारी हैं और जो भी भक्त सच्चे मन से देव गुरु बृहस्पति की पूजा अर्चना करता है वे उनकी सभी मनोकामना पूर्ण करते हैं और हर संकट से उनकी रक्षा करते हैं।

हिंदू वेद में कई जगह इन्हें देवताओं का पुरोहित की उपाधि भी प्राप्त है देव गुरु बृहस्पति की दो पत्नियां थी जिनका नाम तारा और शुभा था।

तो चलिए और अधिक समय व्यर्थ किए बिना देव गुरु श्री बृहस्पति जी की आरती की शुरुआत करते हैं।

बृहस्पति जी की आरती (shri brihaspati dev ji ki aarti)

जय बृहस्पति देवा
ऊँ जय बृहस्पति देवा
छिन छिन भोग लगा‌ऊँ
कदली फल मेवा ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा
तुम अन्तर्यामी
जगतपिता जगदीश्वर
तुम सबके स्वामी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल
सब पातक हर्ता
सकल मनोरथ दायक
कृपा करो भर्ता ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर
जो जन शरण पड़े
प्रभु प्रकट तब होकर
आकर द्घार खड़े ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

दीनदयाल दयानिधि
भक्तन हितकारी
पाप दोष सब हर्ता
भव बंधन हारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

सकल मनोरथ दायक
सब संशय हारो
विषय विकार मिटा‌ओ
संतन सुखकारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

जो को‌ई आरती तेरी
प्रेम सहित गावे
जेठानन्द आनन्दकर
सो निश्चय पावे ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा
जय बृहस्पति देवा ॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।
बोलो बृहस्पति देव भगवान की जय ॥

निष्कर्ष

हिंदू मान्यताओं के अनुसार जो भी देव गुरु बृहस्पति जी की पूजा अर्चना और आरती (shri brihaspati dev ji ki aarti) करता है और अगर देव बृहस्पति उन से प्रसन्न होते हैं तो उन्हें बुद्धि और तेजस्वी का आशीर्वाद प्राप्त होता है इसलिए अगर आप भी अपने जीवन में अपने बुद्धि का विकास और अपने तेज को बढ़ाना चाहते हैं तो हमारा आप सभी से आग्रह होगा कि देव गुरु बृहस्पति जी की पूजा अर्चना करें और उनकी पूजा करते समय इस आरती का उपयोग जरूर करें।

धन्यवाद

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