जय जगदीश हरे आरती | Jagdish ji ki aarti

जय जगदीश हरे आरती

आज की हमारी आरती भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है जिसके बोल हैं ओम जय जगदीश हरे, jagdish ji ki aarti हमारे विचार में पूरे भारतवर्ष में सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती अगर कोई है तो भगवान श्री हरि विष्णु की ओम जय जगदीश हरे ही है। इस आरती का महत्व आप इसी बात से समझ सकते हैं किसका प्रयोग मातृ श्री हरी विष्णु की पूजा में ही नहीं बल्कि लोक उत्सव, समारोह, पूजा पाठ मैं अक्सर सुनाया भी जाता है और इसे गाया भी जाता है।

om jai jagdish hare
om jai jagdish hare

जैसा कि हम सब जानते हैं कि श्री हरि विष्णु इस संसार के पालनहार हैं और मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से इस आरती om jai jagdish hare, jagdish ji ki aarti का गुणगान करते हुए अगर हम श्री हरि विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं तो हमारे जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

आज के इस आरती की शुरुआत करने से पहले आइए जान लेते हैं कि आरती की रचना किसने की थी इस आरती की रचना सन 1870 में पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी द्वारा की गई थी जिन्होंने इस आरती को श्री हरि विष्णु को समर्पित किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी को पंडित श्रद्धा राम शर्मा नाम से भी जाना जाता है वह बहुत ही प्रसिद्ध साहित्यकार, ज्योतिष, संगीतज्ञ और हिंदी के ज्ञाता थे और उनका ताल्लुक पंजाब से था शायद आप में से कई लोग इस बात को ना जानते हो और पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी को हिंदी साहित्य का सबसे पहला उपन्यासकार भी माना जाता है।

श्री हनुमान जी की प्रसिद्द आरती | Shri Hanuman ji ki aarti

Jagdish ji ki aarti, जय जगदीश हरे आरती

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श्री हरि विष्णु की आरती ओम जय जगदीश हरे की शुरुआत करने से पहले मैं आप सब से आग्रह करूंगा कि अगर आप श्री गणेश, शिव, जय अंबे मां की आरती भी एक बार जरूर सुने और पढ़ें जिसे हमने इसी वेबसाइट पर पेश किया है।

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे
दुःख बिनसे मन का
स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे
सुख सम्पति घर आवे
कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

मात पिता तुम मेरे
शरण गहूं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा
तुम बिन और न दूजा
आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम पूरण परमात्मा
तुम अन्तर्यामी
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर
पारब्रह्म परमेश्वर
तुम सब के स्वामी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम करुणा के सागर
तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी
मैं सेवक तुम स्वामी
कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम हो एक अगोचर
सबके प्राणपति
स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय
किस विधि मिलूं दयामय
तुमको मैं कुमति ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता
ठाकुर तुम मेरे
स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ
अपने शरण लगाओ
द्वार पड़ा तेरे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा
स्वमी पाप-कष्ट हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे ॥

Jagdish ji ki aarti lyrics in english

Om jai jagdish hare svaamee jay jagadeesh hare, bhakt janon ke sankat daas janon ke sankat kshan mein door kare . om jay jagadeesh hare.

Jo dhyaave phal paave duhkh binase man ka svaamee duhkh binase man ka sukh sampati ghar aave sukh sampati ghar aave kasht mite tan ka. om jay jagadeesh hare.

Maat pita tum mere sharan gahoon kisakee svaamee sharan gahoon main kisakee tum bin aur na dooja tum bin aur na dooja aas karoon main jisakee. om jay jagadeesh hare.

Tum pooran paramaatma tum antaryaamee svaamee tum antaryaamee paarabrahm parameshvar paarabrahm parameshvar tum sab ke svaamee. om jay jagadeesh hare.

Tum karuna ke saagar tum paalanakarta svaamee tum paalanakarta main moorakh phalakaamee main sevak tum svaamee krpa karo bharta. om jay jagadeesh hare.

Tum ho ek agochar sabake praanapati svaamee sabake praanapati kis vidhi miloon dayaamay kis vidhi miloon dayaamay tumako main kumati. om jay jagadeesh hare.

Deen-bandhu duhkh-harta thaakur tum mere svaamee rakshak tum mere apane haath uthao apane sharan lagao dvaar pada tere. om jay jagadeesh hare.

Vishay-vikaar mitao, paap haro deva svamee paap-kasht haro deva shraddha bhakti badhao shraddha bhakti badhao santan kee seva. om jay jagadeesh hare.

Svaamee jay jagadeesh hare bhakt janon ke sankat daas janon ke sankat kshan mein door kare.

निष्कर्ष

तो यह थी भगवान श्री हरि विष्णु की पावन और भक्तिमय आरती ओम जय जगदीश हरे, jagdish ji ki aarti. हमने इस आरती को यहां पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रस्तुत किया है आप अपनी सुविधा के अनुसार इस आरती का प्रयोग कर सकते हैं.

हमार आप सब से आग्रह होगा कि अपने जीवन से कष्ट और दुखों को दूर करने के लिए नित्य भगवान श्री हरि का स्मरण करें और उनकी पूजा अर्चना करते वक्त इस आरती का गुणगान सच्चे मन से जरूर करें हमारा विश्वास है कि सच्चे मन से की गई इस आरती का गुणगान से श्री हरि विष्णु स्वयं प्रसन्न होते हैं और अपने सच्चे भक्तों की हर मनोकामना जल्द से जल्द पूर्ण करने का आशीर्वाद देते हैं.

भगवान श्री हरि विष्णु आप सबका कल्याण करें.

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