संतोषी माता की आरती { Jay santoshi mata ki aarti }

jay santoshi mata ki aarti
Jay santoshi mata ki aarti

माँ संतोषी की आरती

आज के हमारे इस अध्याय में हम आप सभी के लिए माता संतोषी की भक्ति में और पावन आरती (jay santoshi mata ki aarti) प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारे हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी विशेष देवी-देवताओं को समर्पित होते हैं और शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी के साथ-साथ माता संतोषी को भी समर्पित है, पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री गणेश और ऋद्धि सिद्धि की पुत्री माता संतोषी अत्यंत ही दयालु और अपने भक्तों की सदैव रक्षा करती है और उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करती है।

जो भी भक्त सच्चे मन से माता संतोषी की पूजा अर्चना करता है और शुक्रवार का नियमित रूप से व्रत रखता है मां संतोषी उसके जीवन में धन, धान्य, सुख,a समृद्धि का आशीर्वाद देती है और उसकी हर मनोकामना को पूर्ण करती है।

अगर आप भी अपने जीवन में प्रगति और उन्नति का आशीर्वाद मां से चाहते हैं तो माता संतोषी का नियमित रूप से शुक्रवार का व्रत रखें और उनकी पूजा अर्चना करते समय इस पावन आरती का गुणगान जरूर करें, सच्चे मन से की हुई मां की भक्ति कभी विफल नहीं होती और मां का आशीर्वाद सदैव भक्तों के साथ बना रहता है।

संतोषी माता की आरती, Jay santoshi mata ki aarti

Jai santoshi mata ki aarti(1)
सुनिए माता संतोषी की आरती – jay santoshi mata ki aarti

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता
अपने सेवक जन की
सुख सम्पति दाता॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

सुन्दर चीर सुनहरी
मां धारण कीन्हो
हीरा पन्ना दमके
तन श्रृंगार लीन्हो॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

गेरू लाल छटा छबि
बदन कमल सोहे
मंद हंसत करुणामयी
त्रिभुवन जन मोहे॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी
चंवर दुरे प्यारे
धूप, दीप, मधु, मेवा
भोज धरे न्यारे॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

गुड़ अरु चना परम प्रिय
तामें संतोष कियो।
संतोषी कहलाई
भक्तन वैभव दियो॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

शुक्रवार प्रिय मानत
आज दिवस सोही
भक्त मंडली छाई
कथा सुनत मोही॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

मंदिर जग मग ज्योति
मंगल ध्वनि छाई
विनय करें हम सेवक
चरनन सिर नाई॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

भक्ति भावमय पूजा
अंगीकृत कीजै
जो मन बसे हमारे
इच्छित फल दीजै॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

दुखी दारिद्री रोगी
संकट मुक्त किए
बहु धन धान्य भरे घर
सुख सौभाग्य दिए॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

ध्यान धरे जो तेरा
वांछित फल पायो
पूजा कथा श्रवण कर
घर आनन्द आयो॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

चरण गहे की लज्जा
रखियो जगदम्बे
संकट तू ही निवारे
दयामयी अम्बे॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता॥

सन्तोषी माता की आरती
जो कोई जन गावे
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति
जी भर के पावे॥

जय सन्तोषी माता
मैया जय सन्तोषी माता
अपने सेवक जन की
सुख सम्पति दाता॥

जय सन्तोषी माता

Jay santoshi mata ki aarti in English

Jay santoshi mata ki aarti in English

Jay Santoshi Mata, Maiya Jai Santoshi Mata
Apne Sewak Jan Ki, Sukh Sampati Data

Sundar Chir Sunahri Maa Dharan Kinhon
Hira Pana Damke, Tan Shringar Linyoh
॥ Jai Santoshi Mata॥

Geru Lal Chhata Chhavi, Badan Kamal Sohe
Mand Hansat Karunamayi, Tribhuvan Jan Mohe
॥ Jai Santoshi Mata॥

Swarna Sinhasan Baithi, Chanvar Dhure Pyare
Dhup, Deep, Madhu, Mewa, Bhog Dhare Nyare
॥ Jai Santoshi Mata॥

Gud Aur Chana Param Priya, Tamen Santosh Kiyo
Santoshi Kahlai, Bhaktan Vaibhav Diyo
॥ Jai Santoshi Mata॥

Shukrawar Priya Manat, Aaj Divas Sohi
Bhakti Mandali Chhai, Katha Sunat Mohi
॥ Jai Santoshi Mata॥

Mandir Jag Mag Jyoti, Mangal Dhwani Chhai
Vinai Kare ham Sewak, Charnan Sir Nai
॥ Jai Santoshi Mata॥

Bhakti Bhawmai, Puja Angikrit Kijai
Jo Man Vasai Hamare, Ichhit Phal Dijai
॥ Jai Santoshi Mata॥

Dukh Daridri Raug, Sankat Mukt Kijai
bahu Dhan Dhany Bhare Ghar, Sukh Saubhagya Keejai
॥ Jai Santoshi Mata॥

Dhyan Dhare Jo Tera, Manvanchhit Phal Payo
Puja Katha Shravan Kar, Ghar Anand Aayo
॥ Jai Santoshi Mata॥

Charan Gahe Ki Lajja, Rakhiyo Jagdambe
Sankat Tu Hi Niware, Dayamayi Ambe
॥ Jai Santoshi Mata॥

Santoshi Mata Ki Aarti, Jo Koi Jan Gave
Riddhi-siddhi Sukh Sampati, Ji Bhar Ke Pave
॥ Jai Santoshi Mata॥

Jay Santoshi Mata, Maiya Jai Santoshi Mata
Apne Sewak Jan Ki, Sukh Sampati Data

jay santoshi mata

निष्कर्ष

हमें पूरी उम्मीद है कि अपनी जीवन की सफलता और उन्नति के लिए आप मां संतोषी का व्रत शुक्रवार को अवश्य रखेंगे और व्रत के दौरान माता की पूजा अर्चना करते समय इस आरती, jay santoshi mata ki aarti का गुणगान जरूर करेंगे।

संतोषी मां आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें

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