Vishwakarma aarti | श्री विश्वकर्मा जी की आरती

vishwakarma aarti
vishwakarma aarti

हमारे समस्त पाठकों को हमारा सादर नमस्कार आज के इस अध्याय में हम इस ब्रह्मांड के सबसे प्रथम वास्तुकार विश्वकर्मा जी की आरती vishwakarma aarti प्रस्तुत करने जा रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि समस्त देवी देवताओं के भव्य महल व उनके हत्यारों के निर्माणकार और रचयिता भगवान श्री विश्वकर्मा ही है यहां तक कि देवराज इंद्र का महाशक्तिशाली वज्र का निर्माण भी भगवान श्री विश्वकर्मा ने ही किया था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवराज इंद्र और कई देवी देवता असुरों से परेशान होकर श्री विश्वकर्मा के समक्ष पहुंचे और उनसे प्रार्थना की कि वह कोई ऐसा हथियार बनाए जिससे असुरों का नाश किया जा सके और स्वर्ग लोक की रक्षा की जा सके तब भगवान श्री विश्वकर्मा ने देवराज इंद्र की याचिका पर महर्षि दधीचि की हड्डियों से इतना शक्तिशाली हथियार वज्र का निर्माण किया और इसी वज्र के उपयोग से देवराज इंद्र ने असुरों का नाश किया और यही एक वजह है कि समस्त देवी देवताओं में विश्वकर्मा जी का अहम स्थान है, शायद आप ना जानते हो पर भगवान श्री विश्वकर्मा ने कई अनोखी रचनाएं भी की है जैसे कि रावण की लंका का निर्माण भी श्री विश्वकर्मा ने ही किया था यहां तक की वासुदेव श्री कृष्ण की नगरी द्वारिका और पांडवों का इंद्रप्रस्थ का निर्माण भी विश्वकर्मा जी के हाथों से ही हुआ था।

यह भी अवश्य पढ़े :- शिव आरती

Vishwakarma aarti

Vishwakarma aarti
Vishwakarma ji ki aarti

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा
सकल सृष्टि के करता
रक्षक स्तुति धर्मा॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा।

आदि सृष्टि मे विधि को
श्रुति उपदेश दिया
जीव मात्र का जग में
ज्ञान विकास किया॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा

ऋषि अंगीरा तप से
शांति नहीं पाई
ध्यान किया जब प्रभु का
सकल सिद्धि आई॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा।

रोग ग्रस्त राजा ने
जब आश्रय लीना
संकट मोचन बनकर
दूर दुःखा कीना॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा।

जब रथकार दंपति
तुम्हारी टेर करी
सुनकर दीन प्रार्थना
विपत सगरी हरी॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा।

एकानन चतुरानन
पंचानन राजे
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज
सकल रूप साजे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा।

ध्यान धरे तब पद का
सकल सिद्धि आवे।
मन द्विविधा मिट जावे
अटल शक्ति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा।

श्री विश्वकर्मा की आरती
जो कोई गावे
भजत गजानांद स्वामी
सुख संपति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा
सकल सृष्टि के करता
रक्षक स्तुति धर्मा॥

कब करे विश्वकर्मा की आरती का उपयोग

इस vishwakarma aarti का प्रयोग वह समस्त लोग कर सकते हैं जो निर्माण कार्य से जुड़े हैं और जैसा कि आप सब जानते हैं कि विश्वकर्मा पूजा के दिन विश्वकर्मा जी की विशेष पूजा की जाती है और उस दिन इस आरती का उपयोग आप विश्वकर्मा जी की पूजा करने में कर सकते हैं।

तो यह थी भगवान श्री विश्वकर्मा की पावन आरती हमें पूरी उम्मीद है कि इस आरती का प्रयोग आप श्री विश्वकर्मा जी की पूजा करने में अवश्य करेंगे।

धन्यवाद

अन्य आरती :-

गणेश आरती

माँ अम्बे की आरती

श्री विष्णु की आरती

हनुमान जी की आरती

Leave a Comment

Your email address will not be published.