भगवान शिव को सबसे प्रिय है ये आरती | Shiv ki aarti

भगवन शिव की आरती ‘ॐ जय शिव ओमकारा’

ॐ जय शिव ओंकारा – Shiv ki arti

हमारे सभी पाठकों को हमारा प्यार भरा नमस्कार आज हम आप सभी के लिए देवों के देव महादेव (Shiv) की सबसे शक्तिशाली और मधुर शिव की आरती, shiv ki aarti प्रस्तुत करने जा रहे हैं जैसा कि हम सब जानते हैं कि भगवान शिव को देवों का देव कहा जाता है। हिंदू धर्म में भगवान शिव का काफी अधिक महत्व है, मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा अर्चना करता है और उनके सामने अपने दुख प्रकट करता है भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों के सारे दुख हर लेते हैं और उनके जीवन में सुख शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

shiv ki aarti - ॐ जय शिव ओमकारा
Shiv ki aarti

आज हम जो शिव की आरती, shiv ki aarti प्रस्तुत करने जा रहे हैं वह काफी मधुर और शक्तिशाली भी है, इस शिव आरती का प्रयोग आप शिवजी की पूजा अर्चना करते वक्त कर सकते हैं और अगर इस आरती का प्रयोग सोमवार के दिन जोकि शिवजी की पूजा के लिए शुभ दिन माना जाता है उस दिन किया जाए तो इसका फल दोगुना मिलता है।

हमारा आप सभी से अनुरोध है कि अगर आप भी शिव भक्त हैं और शिव जी की पूजा अर्चना करते हैं तो रोज शिवजी की पूजा करते समय इस shiv ki aarti का एक बार गुणगान जरूर करें हमें पूरी उम्मीद है कि इसके शुभ परिणाम आप सभी को मिलेंगे।

Shiv ki aarti

shiv ki aarti

ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन
पंचानन राजे
हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज
दसभुज अति सोहे
त्रिगुण रूप निरखते
त्रिभुवन जन मोहे
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला,
मुण्डमाला धारी
चंदन मृगमद सोहै
भाले शशिधारी
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर
बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक
भूतादिक संगे
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडल
चक्र त्रिशूलधारी
सुखकारी दुखहारी
जगपालन कारी
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
जानत अविवेका
प्रणवाक्षर में शोभित
ये तीनों एका
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति
जो कोइ नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी
सुख संपति पावे
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री
पार्वती संगा
पार्वती अर्द्धांगी
शिवलहरी गंगा
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती
शंकर कैलासा
भांग धतूर का भोजन
भस्मी में वासा
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है
गल मुण्डन माला
शेष नाग लिपटावत
ओढ़त मृगछाला
जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ
नंदी ब्रह्मचारी
नित उठ दर्शन पावत
महिमा अति भारी
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा
स्वामी जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव
अर्द्धांगी धारा

शिव की आरती का महत्व, Importance of Shiv ki aarti

शिव की आरती का महत्व, Importance of Shiv ki aarti
शिव की आरती का महत्व, Importance of Shiv ki aarti

वैसे तो हमारे हिंदू धर्म में कई देवी देवता हैं हैं पर भगवान शिव उन सभी देवी देवताओं में सबसे प्रमुख हैं और भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें अगर सिर्फ सच्चे मन से याद कर लिया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। आज हम ने जो आरती आप सबके सामने प्रस्तुत की है वह आरती भगवान शिव को काफी प्रिय है और यही एक वजह है कि इस आरती का प्रयोग प्रमुख शिव मंदिरों में किया जाता है।

अगर आप भी ऐसी स्थिति में है जहां पर आपके जीवन में कई दुख और परेशानियां हैं तो हमारा आपसे यही अनुरोध होगा कि किसी भी शुभ सोमवार से भगवान शिव की पूजा अर्चना शुरू करें और उनकी पूजा अर्चना करते समय इस आरती का जाप जरूर करें अगर आप इस आरती का फल दोगुना पाना चाहते हैं तो किसी भी पास के मंदिर जाएं और वहां शिव जी का दूध या शुद्ध जल से अभिषेक करते हुए इस आरती का जाप करें। कुछ ही दिनों में आप अनुभव करेंगे कि आपके जीवन में जो भी दुख और परेशानियां थी वह सब समाप्त होती जा रही हैं।

निष्कर्ष

तो यह थी भगवान शिव की आरती, shiv ki aarti और हमें पूरी उम्मीद है कि आपको यह आरती काफी पसंद आई होगी हमारा आप सब से अनुरोध होगा कि एक बार आप गणेश जी की आरती को भी जरूर पढ़ें और उस आरती का उपयोग भी अपने जीवन में जरूर करें।

भगवान शिव आप सभी की मनोकामना पूरी करें

जय महाकाल

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